Is atma amar
हाँ. जैन धर्म में आत्मा (जिव) शाश्वत होती है—यह मरता नहीं है। आत्मा कभी नहीं मरती; वह जन्म-देह बदलती रहती है क्योंकि कर्मों के बंधन से वह कर्म-फलों के कारण शरीर धारण करती है।
- आत्मा की वास्तविक प्रकृति: निराकार, चेतना-युक्त Deus-like नहीं, बल्कि व्यापक रूप से आत्म-स्वरूप है।
- क्यों जन्म-Death होते हैं: कर्म बंधन से आत्मा को ऐसे देह-रूप मिलते हैं, जिनमें उसे सुख-दुख भोगने पड़ते हैं।
- मुक्ती (मोक्ष): सभी कर्मों का क्षय होने पर आत्मा आत्म-स्वरूप में स्वच्छ हो जाती है और निर्वाण को प्राप्त करती है; तब वह शुद्ध स्थितियों में रहती है।
धर्म में Digambar और Shwetambar के बीच कुछ मत-भिन्नताएँ हो सकती हैं, पर आत्मा की शाश्वतता और कर्मों से बंधन-सम्बंधित मूल विचार समान रहते हैं—आत्मा अटल है, मोक्ष ही उसका लक्ष्य।
अगर चाहें, मैं सरल शब्दों में और उदाहरणों के साथ समझा सकता हूँ।