शाश्वत मंत्र कौनसा है
शाश्वत मंत्र (ईश्वर-उपासन का सर्वाधिक मूल मंत्र)Navkar Mantra या Namokar Mantra है।
पवित्र पाठ (मूल पाठ) आम तौर पर इस प्रकार माना जाता है: णमो अरिहंताणं णमो सिद्धाणं णमो आयरियाणं णमो उवज्झायाणं णमो लोए सव्व साहूणं एसो पंच नमुक्कारो सव्व पावप्पणासणो मंगलाणं च सव्वेसिम पदहमं हवई मंगलं
arth ( अर्थ ) — हर जीव नमस्कार करता है उन पाँच परम आत्माओं को:
- अरिहंत: वे जो भीतर के क्रोध-लोभ-आसक्ति आदि शत्रुओं पर जीत पाते हैं और ज्ञान के पूर्ण रूप को प्राप्त करते हैं।
- सिद्ध: मुक्त आत्मा जो मोक्ष प्राप्त कर चुकी हैं।
- आचार्य: धर्म-ग्रंथों और मार्गदर्शन के शिक्षक।
- उपाध्याय: शास्त्र-शिक्षक, संघ के शिक्षकों के प्रमुख।
- साधु/साध्वी: तपस्वी जैन मुनि-muni और आर्यिका-आर्यिकाएं।
यह मन्त्र सभी पापों का नाश करने वाला माना जाता है और सभी मंगलों में सर्वोत्तम माना जाता है।
विवरण ( Digambar बनाम Shwetambar में सामान्य अंतर ):
- दोनों प्रमुख सम्प्रदाय Navkar Mantra का मूल पाठ स्वीकार करते हैं और इसे अत्यंत पूज्य मानते हैं।
- शब्दों की कुछ ortho-pronunciation या छोटे रूपांतरण Digambar बनाम Shwetambar पर निर्भर मिलते हैं (जैसे उवज्झायाणं के उच्चारण में हल्का फर्क), पर अर्थ वही रहती है: Arihant, Siddha, Acharya, Upadhyaya, Sadhu–Sadhvi के प्रति नमस्कार और पाँच नमस्कारों से पाप-नाश।
नोट: यदि आप चाहें, मैं इसे Digambar और Shwetambar परंपराओं के सुसंगत पाठ रूप में अलग-अलग उद्धृत कर दे सकता/सकती हूँ।