Devlok se aaye aur agli chaubisi mein tirthankar
संक्षेप में जवाब: Jain धर्म के अनुसार 24 तिर्थंकर पृथ्वी पर जन्म लेते हैं। वे देवलोक (स्वर्ग) से सीधे धरती पर आते हैं—यहाँ “आयना” या अवतरण का मूल वर्णन है, पर उनके जन्म पृथ्वी पर ही माने जाते हैं, देवलोक से अगला चक्र है नहीं। इसीलिए “Devlok se aaye aur agli chaubisi mein तिर्थंकर” जैसी धारणा सामान्य नहीं मानी जाती; chaubisi तिर्थंकर वही 24 तिर्थंकर हैं जो पृथ्वी पर जन्म लेकर धर्म का प्रवर्तन करते हैं।
नीचे कुछ संदिग्ध बिंदु साफ़ करते हैं:
- Chaubisi: यह 24 तिर्थंकरों के समूह को दर्शाता है, जो पृथ्वी पर जन्म लेते हैं—हर एक का निर्वाण और जन्म समय अलग कथा-क्रम में आता है।
- देवलोक से आना: कुछ लोक-पुराणों में देवताओं आदि के संदर्भ मिलते हैं, पर तिर्थंकरों के जन्म का मूल स्थान धरती ही है, और इन अवतारों का उद्देश्य मानव-जगत को सही मार्ग दिखाना होता है।
- Digambar बनाम Śvetambar में फर्क: दोनों परंपराओं में 24 तिर्थंकरों की गाथा वहीं रहती है; अरेहक, महावीर आदि के चरित्रों के किन्ही छोटे-छोटे विवरणों में भिन्न भाष्य मिल सकता है, पर केंद्र बिंदु यही है कि वे धरती पर जन्म लेते हैं और kevala-jnan से उद्धार देते हैं।
अगर आप चाहें, मैं 24 तिर्थंकरों की सूची दे दूँ और 각 तिर्थंकर के जन्म/जन्मस्थान की पारंपरिक कहानियाँ (Digambar/Śvetambar के भेद के साथ) संक्षेप में समझा दूँ।