Divo divo re manglik
संक्षेप में जवाब: Jain धर्म में मंगल-dosh (Manglik dosh) जैसी हिन्दू ज्योतिष की धारणा नहीं मानी जाती। जैनी शास्त्रों में ग्रह-नक्षत्रों के आधार पर भाग्य या वैवाहिक-योग नहीं तय होता; कर्म-कुण्डल जैसी चीजें नहीं मानी जातीं। इसलिए “Divo divo manglik” जैसी बात Jain धर्म के अनुसार प्रचलित नहीं है।
कुछ मुख्य बिंदु:
- मंगल dosh का विचार हिन्दू ज्योतिष से है; Jain शास्त्रों में इसका स्थान नहीं है।
- विवाह के विषय में Jain मान्यताएं आचार, शील, समाधि-उद्देश्य, परस्पर नैतिक आचरण (अहिंसा, सत्य, सरलता) आदि पर आधारित होती हैं।
- Digambar बनाम Śvetāmbar में भी ज्योतिष-आधारित दोष-हटाने जैसी मान्यताएँ सामान्यतः प्रमुख नहीं हैं; दोनों ही परमुख रूप से धर्म, संयम, औरклशुद्ध जीवन पर जोर देते हैं।
- अगर विवाह से जुड़ी कोई व्यावहारिक चिंता हो तो उसे धार्मिक-आचार और जीवन-शैली के दायरे में हल किया जाता है, ज्योतिषीय दोष-निवारण नहीं।
यदि आप चाहें, मैं Jain धर्म के अनुसार विवाह-सम्बन्धी नैतिक सिद्धान्तों और परिवार-शिक्षा (संयम, अहिंसा, शांतिपूर्ण जीवन) के बारे में सरल तरीके से और विस्तार से बता सकता हूँ।