चक्रेशं का भावार्थ
मुझे ऐसा शब्द Jain धर्मग्रंथों में सामान्यतः नहीं मिलता। “चक्रेशं” ऐसा व्यवहारिक Jain सन्दर्भ नहीं दिखता—यह शायद किसी हिन्दू भाष्य/नाम से संबंधित हो सकता है (जैसे “चक्रेश्वर” आदि), न कि Jain तिर्थंकरों या Jain स्तोत्रों में स्थायी रूप से उपयोग किया जाने वाला शब्द।
अगर आपके पास यह शब्द किसी खास संदर्भ (सूत्र, स्तोत्र का पूरा नाम या पंक्ति) के साथ है, तो कृपया वह संदर्भ बताइए। मैं उसी आधार पर सही भावार्थ (arth) और Digambar/Shwetambar दोनों परिदृश्य के अनुसार स्पष्ट कर दूँगा।