Jinhe jangal me nagar basakar aahar diya tha
आपके वाक्य में सम्भवत: जंगली/वनवास के दौरान तीर्थंकरों या उनके अनुयायियों को दान में भोजन दिए जाने की बात हो रही है। Jain धर्म में यह सामान्य विचार है कि मोन-गुरुओं (साधु-साध्वी) भिक्षा के मार्ग से भोजन प्राप्त करते हैं और laypeople द्वारा इसे दान किया जाता है—खासकर वन या जंगल में भी उनके प्रवास के समय।
कुछ स्पष्ट बिंदु:
- भिक्षाटन (bhikshā) Jain धर्म का प्रमुख आचार है, जिसमें साधु-साध्वी बिना हिंसा के निष्काम भाव से भोजन लेते हैं, और यह भोजन दान रूप में मिलता है। जंगल/वनस्थली पर भी यह नियम लागू होता है।
- Digambar और Shwetambar परंपराओं में भिक्षाटन के नियमों और संकल्पों में थोड़ा अंतर हो सकता है, पर दोनों ही प्रकारों में दान द्वारा भोजन मिलने की परंपरा महत्वपूर्ण है।
- अगर आप किसी विशिष्ट कथा, सूत्र (sutra) या स्तोत्र का उल्लेख कर दें, तो मैं वही पाठ उसी परिशुद्ध अर्थ (arth) के साथ दे सकता/सकती हूँ और Digambar–Shwetambar के विभेद को स्पष्ट कर दूँगा/दूँगी।
अगर आप चाहें, मैं JainKnowledge की पाठ-सम्बन्धित पन्ने से संबंधित पाठ और अर्थ साझा कर सकता/सकती हूँ (बस बताएँ कि किस कथा, पर्व या स्तोत्र की जानकारी चाहिए)।