Lekin bouddh grantho me to he ki mahavir k shishya buddh se prashn puchhne jaate the aur kai bad me buddh k shishya ban gaye the
संक्षेप में यही बात स्पष्ट कर दूँ कि जैन धर्म की परंपरा में महावीर के शिष्यों (गणधर आदि) के बारे में जो प्रमाणिक ठोस विवरण मिलते हैं, उनसे स्पष्ट है कि उनका धार्मिक मार्ग अलग-अलग था और बुद्ध के शिष्यों से सीधे-सीधे प्रश्न-उत्तर का विवरण सामान्य रूप से नहीं मिलता। कुछ जगहों पर बुद्ध और महावीर के बीच समय-संदर्भ या संवादों के बारे में दंतकथा-सा उल्लेख मिलता है, पर वह पारंपरिक जैन ग्रंथों में मुख्य धारा की मान्यता नहीं है कि महावीर के शिष्य ने बुद्ध से प्रश्न पूछे और फिर वह बुद्ध के शिष्य बन गया।
विशेष बातें:
- महावीर के प्रमुख शिष्यों में गणधर (जगत-संरक्षक-आदि) और उनके अनुयायी आते हैं, जिनके बारे में जैन ग्रंथों में ठोस विवरण मिलते हैं; व्यावहारिक रूप से बुद्ध के शिष्य-वर्ग से सीधे विवाह/प्राप्त शिष्य-रूप तर्क नहीं मिलता।
- Digambar और Śvetāmbara tradition दोनों में कुछ कथाओं में अंतर हो सकता है, पर दोनों की प्राथमिक धारा में महावीर-बुद्ध के बीच प्रत्यक्ष शिष्यों के आदान-प्रदान का प्रमाण स्पष्ट नहीं है।
- अगर किसी ग्रंथ-योजना में ऐसा वर्णन दिखे, वह सामान्य-स्तर की दंतकथा हो सकता है, न कि प्रमाणिक पाठ से प्रमाणित।
यदि आप चाहें, मैं महावीर के शिष्यों के बारे में प्रमाणिक जैन ग्रंथों के संदर्भ के साथ सरल-सी सार-संरचना दे सकता हूँ, या दंतकथा-स्तर के कुछ उदाहरण बताकर فرق समझा सकता हूँ।