What happens on dhoop dashmi
धूप दशमी, दशलक्षण पर्व का छठा दिन होता है. Digambar जैन समुदाय में इसे विशेष महत्त्व के साथ मनाया जाता है; कुछ जगहों पर Shwetambar समुदाय भी उसी दिन इसे मानते हैं लेकिन तिथि और रीति-रिवाजों में क्षेत्रानुसार भिन्नताएं हो सकती हैं।
क्या होता है (संक्षेप में)
- तिथि: भाद्रपद Shukla दशमी (Das Lakshan Parva के क्रम में). अक्सर लगभग 2 सितम्बर 2025 के आस-पास पड़ती है, क्षेत्रीय पंचांग के अनुसार भिन्नता हो सकती है।
- प्रमुख कर्म: मंदिरों में धूप अर्पण/धूप खेवन किया जाता है. धूप से वातावरण शुद्ध माना जाता है और तीर्थंकरों के प्रति भक्ति उजागर होती है.
- उपवास-धर्म: श्रद्धालु व्रत, शुद्धि, धर्मचिंतन, स्वाध्याय आदि अपनाते हैं; कुछ लोग संपूर्ण उपवास या शमाय/प्रत्येकाचार आदि में भिन्नाचार कर सकते हैं.
- उद्देश्य: अशुभ कर्म क्षय करना, पुण्य प्राप्ति और मोक्ष मार्ग को स्पष्ट करना.
सामान्य अर्थ (arth)
- धूप अर्पण के जरिये जिनालय को सुगंधित कर आत्मा की शुद्धि और आत्म-उन्नति की भावना को बढ़ाना।
- दिगंबर परंपरा में इसे खास महत्त्व दिया गया है; श्वेताम्बर पर भी कुछ स्थानों पर इसे समान दिन पर मनाते हैं, पर रीति-रिवाजों में छोटा-सा फर्क होता है।
ध्यान दें
- यह तिथि क्षेत्रीय पंचांग के अनुसार भिन्न हो सकती है।
- कार्यक्रमों की पद्धति स्थान के अनुसार थोड़ा भिन्न हो सकती है।
अगर आप चाहें, मैं इसे और संक्षेप में या किसी खास मंदिर/पंचांग के अनुसार तिथि के अनुसार समझा दूँ. आप चाहें तो मुझे बताएं। You can read more here