सकल तीर्थ वंदन
सकल तीर्थ वंदन का अर्थ:
- सकल तीर्थ = सभी तीर्थ स्थानों और तीर्थंकरों का संकेत है।
- वंदन = नमन/ अभिवादन।
संक्षेप में, सकल तीर्थ वंदन का मतलब है: सभी तीर्थ स्थानों और सभी तीर्थंकरों को सम्मानित और नमन करना। यह भावना Jain धर्म में समस्त तीर्थों के प्रति आस्था और आदर व्यक्त करने के लिए इस्तेमाल होती है, ताकि हर जीव के मुक्तिकथन मार्ग को मान्यता मिले।
नोट:
- Digambar और Shwetambar दोनों परंपाओं में तीर्थ, तीर्थंकरों और नमक-भक्ति के पाठों में थोड़ा-सा भिन्न स्वर या चयनित सूची हो सकती है; पर मूल विचार व्यापक रूप से एक ही रहता है—सब तीर्थों और तीर्थंकरों का सम्मान।
- अगर आप चाहें, मैं इस वाक्य से जुड़ी किसी विशिष्ट स्तोत्र/सुत का मूल पाठ (अगर उपलब्ध हो) और उसका सही अर्थ Digambar/Shwetambar दोनों दृष्टिकोण के साथ दे सकता हूँ।