Why dhoop dashmi is done in digamber , what is the historical resone
धूप दशमी (धूप खेवन, सुगंध दशमी) दसलक्षण पर्व के छठे दिन Digambar जैन samhaj में खास अहमियत रखती है। इसके पीछे का मकसद और इतिहास क्या है, सरल शब्दों में नीचे है:
- क्या है और क्यों मनाते हैं
- दसलक्षण पर्व के क्रम में छहवें दिन बेलाग तिथि के अनुसार धूप अर्पण किया जाता है ताकि जिनालय का वातावरण पवित्र और सुगंधित बने। यह purification और भक्तिभाव को तेज करने की एक परंपरा है।
- धूप को अर्पित कर तीर्थंकरों के प्रति भक्ति दिखाने के साथ साथ पांच पापों (हिंसा, झूठ, चोरी, कुशील, परिग्रह) का त्याग कर आत्म-शुद्धि और मोक्ष मार्ग की अनुभूति का प्रयास किया जाता है। (
jainknowledge.com)
- Digambar बनाम Shwetambar में भिन्नताएं
- Digambar समुदाय में धूप दशमी को विशेष रूप से प्रमुख माना जाता है और यह पर्व-तिथि के भीतर सबसे प्रमुख क्रिया बनती है। Shwetambar परंपरा में भी कुछ जगहों पर इसे इसी तिथि पर मनाया जाता है, पर तरीकों और प्रथाओं में कुछ मामूली भिन्नताएं हो सकती हैं। इसका मूल विचार धूप से वातावरण की पवित्रता और तीर्थंकरों के प्रति श्रद्धा है। (
jainknowledge.com)
- यह भाद्रपद शुक्ल दशमी को मनाई जाती है, दसलक्षण पर्व के क्रम में। क्षेत्रीय पञ्चाङ्ग के अनुसार तिथियाँ थोड़ी भिन्न हो सकती हैं। 2025 के लिए सामान्य अनुमानित तिथि लगभग 2 सितम्बर 2025 होती है। स्थानीय पंचांग देखें ताकि सटीक तिथि मिल सके। (
jainknowledge.com)
- धूप दशमी का उद्देश्य वातावरण को पवित्र बनाना, तीर्थंकरों की कृपा और मार्ग का स्मरण करना, और कर्म-शुद्धि की ओर प्रेरित होना है। इसमें मंदिर में धूप अर्पण के साथ स्वाध्याय, धर्मचिंतन, सामायिक आदि पुण्यकर्म भी चले जाते हैं। (
jainknowledge.com)
आप चाहें तो अपने स्थानीय जैन मंदिर के पंचांग से सटीक तिथि पक्का करवा लें।
You can read more here