पैर के अंगूठे मै कुष्ठ देखकर किसे वैराग्य हुआ
इस प्रश्न में जो कथा कही जा रही है, उसका ठोस स्रोत मेरे स्मृति-भंडार में स्पष्ट नहीं है। जैन ग्रंथों में वैराग्य कई प्रकार के कारणों से जन्म ले सकता है, लेकिन “पैर के अंगूठे में कुष्ठ देखकर” इस विशेष वाक्यघटना के बारे में मुझे प्रमाणिक प्रमाण नहीं दिख रहा।
अगर आप चाहें, मैं उसी कथा के सही स्रोत ( Digambar या Swetambar परंपरा अनुसार) ढूंढकर स्पष्ट arth के साथ उत्तर दे दूँ।