भव्य कितने प्रकार के होते है ?
भव्य का सामान्य अर्थ है विशाल, सुंदर या अत्यंत गुणवान। Jain धर्मशास्त्रों में “भव्य प्रकार” के ठोस किसी खास वर्ग की मानक सूची नहीं मिलती; यानी शास्त्रो में उसे एक निर्धारित प्रकार के रूप में अलग-अलग प्रकार से नहीं गिना गया है।
अगर आप किसी विशिष्ट पाठ, स्तोत्र या संकल्प में देखे गए “भव्य” शब्द के बारे में पुछ रहे थे, तो कृपया वही पाठ बताएं ताकि मैं उसी के संदर्भ से स्पष्ट और सही अर्थ दे सकूं।