संयम के कितने भेद होते है ?
संयम के मुख्य रूप दो प्रकार से माने जाते हैं:
- बाह्य संयम: शारीरिक आचरण, जैसे भोजन-उपवास, व्यायाम-आचार इत्यादि ताकि अहिंसा और शुद्धता बनी रहे।
- आंतरिक संयम: मन और वाणी पर नियंत्रण—ईश्वर के अनुसार सोच, भाव और बोलचाल को संयमित रखना।
इन दोनों के भीतर अलग-अलग प्रथाओं की संगति Digambar बनाम Shwetambar पर थोड़ी भिन्न हो सकती है, और किसी-किसी ग्रंथ में इन्हें आगे पाँच/तटस्थ उप-वर्गों में भी बाँटा गया है। अगर आप चाहें तो मैं Digambar और Shwetambar परस्पर भिन्न व्याख्या के साथ संयम के उप-वर्ग बताने वाला संक्षेप दे दूँ।
आप किस दिशा में विस्तार चाहते हैं—बाह्य बनाम आंतरिक संयम का स्पष्ट विभाजन, या Digambar/Shwetambar के specific विभाजन?