What is the usual time span between birth of any 2 tirthankars
जैन धर्मशास्त्र में एक सामान्य “लगभग एक निश्चित अंतराल” नहीं बताया गया है। 24 तिथंरक एक अहोरात्र चक्र (आवसर्पिणी/उत्तर्पिणी) में जन्म लेते हैं, पर प्रत्येक तिथंरक के जन्म के बीच का समय स्थिर नहीं होता; यह व्यापक समय-विस्तार के भीतर अनेक लाखों वर्षों से करोड़ों वर्षों तक हो सकता है।
इसका कारण:
- अलौकिक समय-चक्र (आवसर्पिणी और उत्तर्पिणी) में कई युग आते हैं और हर तिथंरक के जन्म-समय का अंतर अलग-अलग होता है।
- प्रारम्भिक काल में अंतराल अधिक और बाद के काल में परिवर्तनशील हो सकता है।
यदि आप चाहें, मैं इसे संक्षेप में एक-दो उदाहरणों के साथ स्पष्ट कर दूँ—पर याद रखिए, वे उदाहरण भी राही-समय की विशालकाय धारा के भीतर आते हैं, सो कोई एक निर्धारित “सबसे आम” संख्या नहीं मानी जाती।