aadinath Bhagwan ko Keval Gyan kahan prapt hua
Adinath Bhagwan (Rishabhanath) ने keval jnana Purimtalpur (Purimatalapur) नगर, Prayag (Allahabad) के Akshayavat वट के नीचे प्रकट किया था। यह कथा Jain पुराणों में मिलती है: keval jnana अक्षयवट के नीचे, करीब 11th Falgun कृष्ण पक्ष के दिन, अपना तप समाप्त कर के प्रस्फुटित हुआ। इसके बाद उन्होंने समवसरण की स्थापना और उपदेश दिए।
नोट:
- Digambar और Shwetambar परंपराओं में मूल घटनाक्रम में समानता मानी जाती है, पर स्थान और नामों के पारंपरिक विवरण में कुछ ग्रंथों में हल्की भिन्नताएँ मिलती हैं।
- ऐतिहासिक/पौराणिक स्थलों के बारे में कुछ धारणा Prayag के Akshayavat से जुड़ी हैं; आधुनिक मंदिर/स्थानांतरण के बारे में पुरातात्विक संदर्भ अलग-अलग ग्रंथों में नहीं समान होते।
अगर चाहें, मैं इस विषय से जुड़ी सही पुराणिक बारीकियाँ और स्थलों के संदर्भों को Digambar और Shwetambar के अनुसार अलग-अलग बताते हुए दे सकता हूँ।