मान करके मुंडित हुए
यह वाक्य “मानकर मुंडित हुए” Jain धर्म में प्रायः सेमल (diksha) या संन्यास लेने के संकेत के रूप में समझा जाता है। जब व्यक्ति संसारिक जीवन के मोह-आसक्ति को छोड़कर आचार-उपासना के मार्ग पर चलने का निर्णय लेता है, तब उसे अपने बाल काटकर सिर-मुकुट का प्रतीक त्याग किया जाता है। बाल मुंडन शरीर और मन के मोह से निर्लेप होने का संकेत है, और यह संन्यास-सम्पन्न जीवन की शुरुआत का outward तौर पर संकेत होता है।
महत्वपूर्ण बिंदु (टिप्पणी के तौर पर):
- संन्यास लेने पर जन्म/पारिवारिक जीवन के बंधन छोड़ने के लिए मुंडन किया जाना सामान्य है।
- Digambar और Shwetambar संप्रदायों के बीच कुछ व्यवहारी भिन्नताएँ हैं:
- दोनों ही पारंपरिक ढंग से मुंडन को संन्यास की पुष्टि मानते हैं, पर पहनावे और दैनिक आचरण में अंतर रहते हैं।
अगर आप चाहें, मैं इस विषय पर Digambar और Shwetambar दोनों traditions के ठोस arth (व्याख्या) और प्रामाणिक सूत्र-उद्धरण के साथ सरल व्याख्या दे दूँ।