kisne tote ko namokar mantra sunaya
यह सवाल साड़ा-साफ Jain धम्म की परंपरा में स्पष्ट नहीं मिलता कि “टोटे” को किसने नमोकार मंत्र सुनाया या सिखाया था।_navarkar/णमोकार महामंत्र_ अनादि/अनंत माना जाता है और इसे किसी एक व्यक्ति ने नहीं बल्कि पूरे गुणों (अरीहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय, साधु) के प्रति नमस्कार के रूप में माना जाता है। इसे पहली बार लिखित रूप में लिपिबद्ध करने का श्रेय आम तौर पर आचार्य पुष्पदंतजी महाराज को दिया गया है, और विभिन्न मतों में इसकी परंपरा Mahāvīra के शिष्य-सम्प्रदायों के संदर्भ में बताई जाती है। अतः “टोटे” को मंत्र सुनाने वाला किसी विशिष्ट नाम Jain परंपरा में पुष्ट नहीं दिखता। नेवकार मंत्र आयु-समय से चला आ रहा एक सार्वभौमिक निष्ठा-स्वर है।
संक्षेप arth (Meaning):
- नमस्कार मंत्र पांच परमेश्वरों को है: अरिहंत, सिद्ध, आयरियाण (आचार्य/गुरु-समूह), उवझायाण (उपाध्याय) और समस्त साधु-साध्वी।
- इसे किसी एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि गुण-स्वरूपी आध्यात्मिक श्रेष्ठताओं को नमस्कार किया जाता है।
- यह मंत्र अनादि-आनंदी है और Jain धर्म में Moksha की राह का हिस्सा माना जाता है।
थोड़ा सा इतिहास बतौर संदर्भ:
- नमोकार मंत्र को लिखित रूप में पहली बार Satkhandagama के मंगलाचरण के रूप में लिपिबद्ध करने का श्रेय आचार्य पुष्पदंतजी महाराज को है (द्वितीय शताब्दी में) — ऐसा मानना प्रचलित है। भाग-भाग मठ-मत भिन्न हो सकते हैं, मगर मूल भावना वही है। ( navkarsadhana.com, ahimsabharti.com)
- यह मंत्र Digambara और Shvetambara दोनों में एक समान पूज्य माना जाता है; इसमें किसी एक समुदाय के नाम, गुरु-गण या देवी-देवता का व्यक्तिगत उल्लेख नहीं होता। ( jainknowledge.com)
आप चाहें तो Navkar मंत्र का पूरा अर्थ और स्वरूप यहां देख सकते हैं:
ध्यान रहे: अगर आपके मन में Tote के बारे में कोई कथा/संदर्भ है, तो संभव है वह कोई क्षेत्रीय/छोटी कथा हो सकती है; पर उसे साधारण Jain साहित्य में मानक रूप से दर्ज नहीं किया गया है।