Tikhoto aya hinam.. when to recite
तिक्खुत्तो (Tikhutto) एक गुरु- vandan का प्राकृत स्तोत्र है। इसका मूल प्रयोग andtim-धर्म में गुरु/आचार्य के सामने नमस्कार-आचरण से जुड़ा है।
When to recite:
- श्वेतांबर (श्वेताम्बर/श्वेतांबर Terapanth/SThānakavāsī) परंपरा में इसे गुरु-वत्सल आचार्य या गुरुवंदन के समय, प्रातः या प्रायः प्रतिक्रमन (Pratikraman) या चैत्यवंदन के दौरान तीन बार दायँ-फेर कर recite किया जाता है.
- डिगंबर परंपरा में यह पाठ सामान्य रूप से शामिल नहीं होता; उनके गुरु- vandan के लिए अन्य स्तोत्र/हिम्न प्रचलित होते हैं.
संक्षिप्त अर्थ (arth):
- आयाहिणं पयाहिणं करेमि वंदामि नमंसामि सक्कारेमि सम्माणेमि: आप तीन बार दाहिनी तरफ clockwise घूमकर वंदना, नमस्कार, सम्मान करते हैं; आपkal्याणरूप, मंगलरूप, देव-उत्तम गुरुदेव हैं; मैं सेवा करता/करती हूँ और माथा झुकाकर चरणकमलों में प्रणाम करता/करती हूँ।
- यह भाव गुरु-गणों के प्रति विनय, सम्मान और सत्कार की अभिव्यक्ति है।
आप शुरुआती स्रोत/व्यवहार की जगह इन पाठों के बारे में अधिक विवरण यहाँ पढ़ सकते हैं:
- तिक्खुत्तो सूत्र (गुरुवंदन/चैत्यावंदन के साथ दिनचर्या में उपयोग) ( jainknowledge.com)
- तिक्खुत्तो का पाठ (कब/कैसे Recite करें) ( jainknowledge.com)
- तिक्खुत्तो पाठ के बारे में सामान्य पंक्तियाँ और उदाहरण/व्याख्या (गुरुवंदन के भाग के रूप में) ( arihantanam.blogspot.com)