अगर त्रसकाय के सिर्फ दो भेद बताए हो तो क्या बताएंगे
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त्रसकाय के दो प्रमुख भेद (ब्रह्म-जैन परम्परा के अनुसार) हैं:
- विकलेंद्रिय: वह जीव जिनके पास गति करने की शक्ति है, यानी चल-फिर सकते हैं।
- सकलेंद्रिय: वह जीव जो एक से अधिक इन्द्रियों वाले होते हैं, और वे एकाधिक इन्द्रियों से संचालित रहते हैं।
इन दोनों के भीतर थोड़ा विस्तार कुछ इस प्रकार है:
- विकलेंद्रिय के अन्तर्गत दो उप-भेद होते हैं: तेजस्काय और वायुकाय।
- सकलेंद्रिय के अन्तर्गत चार उप-भेद होते हैं: द्वेन्द्रिय, त्रेन्द्रिय, चतुरिन्दriy, और पञ्चेन्द्रिय (मन सहित या मनरहित विविध स्थितियाँ भी वर्णित होती हैं)।
अर्थात् कुल मिलाकर त्रसकाय के दो बड़े भेद ही मुख्य हैं, और उसके भीतर इन्द्रिय-गण के अनुसार Further उपभेद आते हैं। यह विवरण द्वादश (दिगम्बर-श्वेताम्बर) दोनों परम्पराओं में मान्य माना जाता है।
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