panch paap konse hote hai
265
पाँच पाप (Panch Mahapap) कौन-कौन से हैं:
- हिंसा (Himsa): जीवों को नुकसान पहुँचाना या मारना.
- असत्य (Asatya): झूठ बोलना या गलत भाषा/प्रमाण কথা.
- अदत्तदान/चोरी (Adattadana): जो सही से नहीं दिया गया उसे लेना।
- मैथुन/अब्रह्मचर्य (Maithuna): असुरक्षित या अनुचित वर्ग में संभोग या अशुद्ध यौनाचार।
- परिग्रह (Parigraha): अनावश्यक संपत्ति-लिप्सा या अत्यधिक संग्रह।
इन पाँच पापों को जैन धम्म में विशेष रूप से रोकना माना गया है, ताकि आत्मा कर्मबन्धन कम होकर मोक्ष की दिशा सहज बने. कई ग्रंथों में इन पाँच के अलावा 18 पापों का भी उल्लेख मिलता है, पर पञ्च महापाप वही पाँच प्रमुख पाप माने जाते हैं जिन्हें सभी जैन श्रद्धालु अपने जीवन से दूर रखने का प्रयास کرتے हैं. Digambar एवं Shwetambar दोनों परंपराओं में इन पाँचों का मूल अर्थ समान रहता है; कुछ स्रोत 18 पापों तक विस्तृत बताते हैं, पर पाँच प्रमुख पाप सामान्य रूप से समान रहते हैं.