jain kehlane ke layak 3 mool siddhant konse hote hai
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तीन मोल सिद्धांत (त्रि-रत्न) जो जैन धर्म में मोक्ष के मार्ग को बनाते हैं:
- सम्यक दर्शन (Samyak Darshan) – सही दर्शन/विश्वास; आत्मा जिंदा है और कर्म-बन्धन के नियम समझना।
- सम्यक ज्ञान (Samyak Gyan) – सही ज्ञान; tattva के सत्य ज्ञान को समझना (जiva, ajiva, कर्म, मोक्ष आदि को स्पष्ट समझना)।
- सम्यक आचरण (Samyak Charitra) – सही आचरण; पाँच छह शास्त्र-नियमों के अनुरूप आचरण करना और दुर्बलताओं से बचना।
ये तीनों मिलकर Ratnatraya (तीन रत्न) बनाते हैं और इन्हीं के रास्ते से जैनी लोग मोक्ष की ओर बढ़ते हैं। Digambar और Shwetambar के बीच मूल अर्थ निष्कलंक रहता है; व्याख्या में कभी-कभी भाष्य/व्याख्या में भिन्नताएं पाई जाती हैं, पर लक्ष्य वही है: सही दर्शन, सही ज्ञान और सही आचरण।
आप आगे इन तीनों के बारे में सरल व्याख्या और उनके उद्धरण/सूत्रों की हिन्दी व्याख्या भी चाहें, तो मैं बतला सकता हूँ। आप चाहें तो और भी स्पष्ट जानकारी के लिए आप इन पन्नों से पढ़ सकते हैं: