जैन आगमों की मूल्याक्मक शिक्षा - आगम के original text से अध्यन, पाना नं, श्लोक नं के साथ बताए
जैन आगमों के मूल पाठों से अध्यन करना एक गहरा और विशिष्ट विषय है. मैं नीचे एक संक्षिप्त मार्गदर्शन देता हूँ ताकि आप सही पाठ/श्लोक संख्या तक सीधे पहुँच सकें, और इसके साथ यह भी स्पष्ट कर दूँ कि Digambar और Śvetāmbara परंपराओं में पाठों के क्रम और उपलब्धि में अंतर होता है.
- आगम वही soport हैं जिन्हें जैन परंपरा में “आगम” कहा जाता है, और इनकी वर्ग-संरचना प्रमुख रूप से दो traditions में भिन्न मानी जाती है: Śvetāmbara और Digambarā. Śvetāmbara परंपरा के पास आज उपलब्ध (पुष्टि-योग्य) अनेक पाठों का दायरा है (आमतौर पर 11 अंग-आगम और उसके उपांग/अन्य वर्ग), जबकि Digambarā परंपरा मानती है कि मूल आगम का अधिकांश भाग लुप्त हो गया है और उनके पास अलग संरचना है. इसका अंतर पाठों की सूची, अध्याय-श्लोक संख्या और मूल देहायन में स्पष्ट होता है। इस अंतर को समझना अध्यन के साथ-साथ जरूरी है ताकि आप सही श्लोक-नंबर और मूल पाठ तक पहुँच सकें। ( jainknowledge.com)
- यदि आप किसी विशिष्ट आगम के श्लोक/पन्ना संख्या समेत मूल पाठ चाहते हैं, तो आम तौर पर सबसे पहले इन पाठों की संकलित संरचना देखें:
- मूल पाठ के स्पष्ट पाठ (Shloka) और अध्याय संख्या पाना/पन्ना नंबर के साथ चाहते समय, सबसे सही स्रोत वे जिनमें आगम-गॉन्त्री के श्लोक सही-सही क्रम शामिल हों. बतौर वैचारिक ढांचा, Śvetāmbara आगमों के संकेत और श्लोक-क्रम नीचे दिखते हैं ( Digambara/Śvetāmbara के बीच भिन्नता के कारण अलग-अलग संस्करण मिलेंगे):
- एहि समय के लिए एक स्पष्ट उद्धरण देना या पन्ना-श्लोक संख्या देना तभी संभव है जब आप बताएं कि आप किस आगम के किस भाग (उदा., आचारंग Sutra के प्रथम अध्याय के श्लोक 1–3) के बारे में जानना चाहते हैं. मैं उसी आगम के मूल पाठ से सीधे श्लोक संख्या के साथ उद्धरण और अर्थ (arth) प्रदान कर दूँगा, तथा Digambarā/Śvetāmbara दोनों मतभेदों के अनुसार भिन्नताओं को स्पष्ट कर दूँगा.
आप चाहें तो मैं आपके लिए विशिष्ट आगम (जैसे आचारंग, सुत्रत्रंग आदि) के किसी एक पाठ के बारे में ठोस मूल पाठ उद्धरण-श्लोक संख्या के साथ प्रारम्भिक अध्याय-जलवायु दे सकता हूँ. साथ में मैं उन श्लोको के अर्थ ( arth ) भी स्पष्ट कर दूँगा, ताकि आप सही ढंग से समझ सकें कि वह आगम क्या बताने को कहता है।
Note: अगर आप किसी खास आगम/पाठ का नाम बताएं (जैसे “आचारंग सूत्र” या “सुत्रत्रंग सूत्र” आदि) तो मैं उसी के मूल पाठ से पाना-श्लोक संख्या सहित उद्धरण और अर्थ दे दूँगा, साथ में Digambarā-Śvetāmbara भिन्नताओं को स्पष्ट कर दूँगा.