सम्यक क्या है
सम्यक (Samyak) Jainism में तीन प्रमुख गुणों/ज्वेलों में से एक है और इसका मतलब है सही या उचित-देखना, सही विश्वास, सही ज्ञान और सही आचरण की समेकित दिशा।
- सम्यक दर्शन (Samyak Darshan) = सही दृष्टिकोण/विश्वास: सच क्या है, उसे समझना और स्व-नियत सत्य की तरफ उन्मुख होना।
- सम्यक ज्ञान (Samyak Jnana) = सही जानकारियाँ: वास्तविक tattvas (जिव, अजiva, आस्रा, बंध, संवर, निर्वार, मोक्ष) आदि को सही समझना।
- सम्यक चरित्र (Samyak Charitra) = सही आचरण: विचार-भाषा-क्रिया में अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह आदि नैतिक मूल्यों का पालन।
इन तीनों का संयोजनmoksha/ liberated state के मार्ग को बनाते हैं; एक के बिना दूसरा संभव नहीं माना जाता। Digambar और Shwetambar परंपराओं में ये तीनों की मूल मान्यताएँ एक जैसी हैं, पर कुछ liturgical/मार्ग-व्यवहार में छोटे भेद हो सकते हैं (यथा पूजा-आचार की अभिवृत्ति या विशिष्ट रीति-रिवाज), पर अर्थ और उद्देश्य वही रहता है।