HOW MANY UPDHAYA AVAILABLE IN JAIN SHASHAN
संक्षेप में:
- जैन शासन में उपाध्याय एक आचार्य-श्रेणी के विद्वान संन्यासी होते हैं, जिनको आगम-शास्त्रों का अध्ययन कराकर_OTHER सन्धान-चर्चा करवाने का उत्तरदायित्व दिया जाता है। उपाध्याय की संख्या स्थिर नहीं रहती; हर संघ और परंपरा में योग्य उपाध्यायों की गिनती अलग-अलग हो सकती है।
- उपाध्याय के गुण (25 गुण) बताए गए हैं — यानी उपाध्याय के भीतर रखने योग्य 25 specific गुण माने जाते हैं।
आप यह भी जान लें:
- उपाध्याय के 25 गुणों के बारे में जैनKnowledge की प्रविष्टियों में इसी संख्या का वर्णन मिलता है। ( jainknowledge.com)
- यह समझना उचित है कि दोनों प्रमुख परंपराओं (श्वेतांबर और Digambar) में उपाध्याय की भूमिका समान है, पर संकल्पनाओं और शिक्षण-व्यवस्था में कुछ परंपरागत मतभेद हो सकते हैं।