Sammed shikhar ek baar jo vande koi narak pashu gati na hoi
यह कहावत एक प्रसिद्ध Jain मान्यता है: “Ek Bar Vande Jo Koi, Tahi Narak Pashu Gati Nahi Hoi.” यानी जैसे ही कोई व्यक्ति एक बार सम्मेद शिखरजी (समेट शिखर) की वंदना करता है, उसे नरक में जन्म नहीं लेना पड़ता और पशु-गति जैसी दुर्गति नहीं मिलतीBelieving that a single sincere worship at Sammed Shikharji can prevent rebirth in narak (hell) or as a animal.
सरल अर्थ (arth):
- सम्मेद शिखरजी को एक पवित्र तीर्थ माना जाता है जहां 20 तिर्थंकरों की मोक्ष-कथा जुड़ी है.
- यहां एक बार भी पूरी श्रद्धा से आचरण करने पर soul के कर्म साफ होते हैं, और श्रेणी बदले बिना भव्य जीव बनकर मोक्षण की ओर बढ़ सकता है.
- यह कहावत तीर्थ यात्रा की महत्ता और तर्पण-भाव के महत्व को प्रकट करती है; भले ही कितनी बार जन्म हो, शास्त्रों के अनुसार एक बार सही Bhav से किया गया दर्शन/वंदना, मोक्ष के मार्ग की दिशा दे सकता है.
धार्मिक विविधताएं (Digambar vs. Shwetambar):
- दोनों परंपराओं के लिए सम्मेद शिखरजी अत्यंत पवित्र तीर्थ है और मोक्ष-स्थान माना जाता है; उस स्थल पर भगवान पार्श्वनाथ आदि Tirthankara’s के स्थान-नิเวास और मोक्ष की कथाएँ समान रूप से मान्य हैं.
- विवरणों में सूक्ष्म भेद हो सकता है, जैसे कैसे 20 Tirthankaras ने यहाँ मोक्ष पाया इत्यादि के कथन में ग्रंथ-ग्रंथांत भिन्न हो सकते हैं; पर मूल भावना—एक बार श्रद्धापूर्वक दर्शन-वंदना से पवित्रता और मोक्ष की दिशा—समरस है.
ध्यातव्य बात:
- यदि आपको चाहें, मैं इस विषय पर द्व-Janakari लेख भी दे सकता हूँ; नीचे दिए लिंक से आप इस स्थल के बारे में अधिक जानकारी देख सकते हैं.