सूर्यास्त कब खाना क्यों नहीं खाते
संक्षेप में:
- सूर्योदय के पहले–दोपहर के समय ही भोजन करना कुछ जैन समुदायों में सामान्य मान्यता है; आमतौर पर सूर्योदय के बाद खाने से बचा जाता है।
- यह नियम खासकर Das Lakshan/Paryushan आदि पर्वों के दौरान कड़ाई से माना जाता है, और Digambar बनाम Shvetambar पर थोड़ा-सा भिन्न हो सकता है: कुछ में पूरी तरह रात में खाना छोड़ना (चोविहार/चौहिवहार) या केवल दिन के भीतर खाने की नीति होती है; कुछ लोग अपने आचार्य या pachchakkhan (व vow) के अनुसार ढीला या कड़ा नियम लेते हैं।
- पीछे का कारण अहिंसा, सरलता, और जीव-जंतुओं के प्रति करुणा को बनाए रखना, साथ ही पाचन-बुद्धि और मानसिक संतुलन को बेहतर रखना माना जाता है।
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