Meaning of Saath lakh sootra
Saath lakh sutra (Saat Laakh Sutra) is a short pratikraman verse in Jainism. It lists the 84 lakh (8.4 million) life-forms in the universe and ends with an apology for any injury done to any living being.
Original text (seen in many traditional recitations)
- सात लाख पृथ्वीकाय,
- सात लाख अप्काय,
- सात लाख तेउकाय,
- सात लाख वाउकाय,
- दस लाख प्रत्येक वनस्पति-काय,
- चौदह लाख सामान्य वनस्पति-काय,
- दो लाख द्विंद्रिय,
- दो लाख त्रिंद्रिय,
- दो लाख चउरिन्द्रिय,
- चार लाख देवता,
- चार लाख नारकी,
- चार लाख तिर्यंच पंचेंद्रिय,
- चौदह लाख मनुष्य
- इसी प्रकार चौसठ हजार जिव-योनि में से मेरे जीव ने जो कोई जीव-हिंसा की हो, करायी हो, करते हुए का अनुमोदना किया हो, उन सब का मन-वचन-काय से मिच्छा mi dukkaḍam...
Arth (meaning)
- यह श्लок 84 लाख जिव-योनि (जीव-रूप) की व्यापक सूची देता है।
- अंत में जो BIOLOGICAL हिंसा या हिंसा की क्रिया हुई हो, उसके लिए जीव स्वयं से मिच्छा-mi-dukkaḍam (मन, वचन, काय से क्षमा) मांगता है—यानी किसी भी जीव-हिंसा के लिए क्षमा प्रार्थना।
- यह प्रायः प्रतिक्रमण/पार्थिव-चिंतन के समय बोला जाता है ताकि अहिंसा का आचरण बने और जीवों के प्रति संवेदना जगे।
महत्व और परंपरा
- यह पाठ Digambar और Shwetambar दोनों परंपराओं में समान रूप से मिलते हैं; क्रम और संख्या के मामले में परंपरागत पाठों में आम सहमति रहती है।
- इसका मूल उद्देश्य अहिंसा का अभ्यास और सभी जीवन के प्रति करुणा की भावना को दृढ़ करना है।
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- Saat Laakh Sutra en inglés meaning
- Saat Laakh Sutra with audio/lyrics