सामायिक की शास्त्रोक्त विधि क्या है?
सामायिक की शास्त्रोक्त विधि (संक्षिप्त सार)
- क्या है: सामायिक एक नैमित्तिक (स्थिर) साधना है जिसमें मन, वचन और काय से शांति-समता के साथ एक निर्धारित समय के लिए आत्म-शुद्धि और कर्म-शास्त्र के अनुरूप आचरण किया जाता है। सामान्य तौर पर यह 48 मिनट की अवधि के लिए की जाती है ( muhurta = 48 मिनट ), पर परंपरा के अनुसार समय थोड़े भिन्न भी हो सकता है. यह गृहस्थ श्रावकों के लिए एक व्यवस्थित पूर्व निर्धारित अभ्यास है. ( jainknowledge.com)
- मुख्य उद्देश्य: अहिंसा, सत्य, असत्य-ना कहना, चोरी-ना करना, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह जैसे नियमों के प्रति स्थिर मानसिक और नैतिक आचरण बनाए रखना; आत्मा की श्रद्धा, समता और पवित्रता को बढ़ाना। ( jainknowledge.com)
- प्रमुख संरचना (आमतौर पर कई घरानों में अपनाई जाती है):
- Digambar बनाम Shvetambar के बीच लगभग समान मूल भाव, पर संकलन/पाठों के स्वरूप और कुछ मंत्र/छंदों में छोटा-सा अंतर हो सकता है। दोनों में उद्देश्य वही है: समता-भाव, आत्मशुद्धि और कर्म-बंधन को कम करना। अगर आप चाहें, मैं इन दोTraditions के विशिष्ट पाठ/संस्कृत भागों का छोटा सा नमूना दे सकता हूँ।
- संक्षिप्त पाठ/संकेतक शब्द (संक्षेप में प्रयुक्त प्रचलित संकल्प भाग): सामायिक के संकल्प के पाठ में आम तौर पर यह तत्व आते हैं—अपने से: नमो सिद्धाणं, नमो अरिहंताणं, नमो आयरियाणं, नमो उवज्जायाणं, नमो लोए-सव्वसाहूणं, एषो पंच नमोक्कायाणं, नमो मान्ढाणि आदि (यह संकल्प घर-घर में थोड़ा-बहुत बदला जा सकता है) और साथ में मन्त्रोच्चारण/प्रार्थनाएँ। ( jainknowledge.com)
यदि आप चाहें, मैं ऊपर बताए गए 48-मिनट सामायिक की पूरी पाठ-क्रम (भाषा सहित संकल्प और प्रार्थनाओं का एक संक्षित संस्करण) आपके लिए दे सकता हूं।