Meaning of navkar in hindi
नवकार (णमोकार) मंत्र का सरल अर्थ – हिंदी में
पहले मूल मंत्र (प्राकृत):
- णमो अरिहंताणं
- णमो सिद्धाणं
- णमो आयरियाणं
- णमो उवज्झायाणं
- णमो लोए सव्वसाहूणं
- एसो पंच णमोक्कारो
- सव्वपावप्पणासणो
- मंगलाणं च सव्वेसिं
- पढमं हवइ मंगलं
अब पंक्ति‑पंक्ति अर्थ (बहुत सरल भाषा में):
1) णमो अरिहंताणं मैं अरिहंतों को नमस्कार करता हूँ – जिन्होंने क्रोध, मान, माया, लोभ जैसे भीतर के सभी शत्रुओं को जीत लिया है और सही दर्शन, सही ज्ञान और सही चरित्र से पूर्ण हैं।
2) णमो सिद्धाणं मैं सिद्धों को नमस्कार करता हूँ – जिनके सारे कर्म खत्म हो चुके हैं, जिन्होंने मोक्ष पाया है, अब उनका शरीर नहीं है, वे हमेशा के लिए आनंद, अनंत ज्ञान और शांति में स्थित हैं।
3) णमो आयरियाणं मैं आचार्यों को नमस्कार करता हूँ – जो जैन मुनि‑संघ के मुखिया हैं, नियम और धर्म‑मार्ग को ठीक से चलाते और सबको मार्ग बताते हैं।
4) णमो उवज्झायाणं मैं उपाध्यायों को नमस्कार करता हूँ – जो आगम / शास्त्र पढ़ते‑पढ़ाते हैं और साधुओं को धर्म का सही अध्ययन करवाते हैं।
5) णमो लोए सव्वसाहूणं मैं सभी साधु‑साध्वी (संतों) को नमस्कार करता हूँ – जो संसार भर में कहीं भी हों, और सही आचरण व संयम से जीवन बिता रहे हैं।
6) एसो पंच णमोक्कारो इन पाँचों (अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय, साधु) को किया हुआ यह नमस्कार…
7) सव्वपावप्पणासणो …सभी पापों / अशुभ कर्मों का नाश करने वाला है।
8) मंगलाणं च सव्वेसिं सभी मंगल कार्यों और शुभ वस्तुओं में…
9) पढमं हवइ मंगलं …यह सबसे पहला और सबसे बड़ा मंगल है।
संक्षेप में भाव
- यह मंत्र किसी व्यक्ति‑विशेष का नहीं, गुणों का नमस्कार है।
- पाँच परमेष्ठी के गुणों को याद करके, हम अपने भीतर भी वैसा ही पवित्र जीवन और स्वभाव लाने का संकल्प करते हैं।
- दिगंबर और श्वेतांबर – दोनों परंपराओं में अर्थ एक ही है; केवल उच्चारण में थोड़ा फर्क हो सकता है, पर भाव शुद्ध और समान रहता है।
थोड़ा और पढ़ना चाहें तो यहाँ देख सकते हैं: नवकार मंत्र का पाठ और लाभ नवकार मंत्र का सरल अर्थ (हिंदी)