EXPLAIN ABOUT SIDDHASHILA
Siddhashila (सिद्धशिला / सिद्धलोक) का अर्थ बहुत सरल है – सभी मुक्त आत्माओं (सिद्धों) का शुद्ध, शाश्वत निवास स्थान।
1. सिद्धशिला क्या है?
- “सिद्ध” = जिसने सारे कर्म नष्ट कर दिए, पूर्ण मुक्त आत्मा
- “शिला / लोक” = स्थान / क्षेत्र
- यह वही स्थान है जहाँ मोक्ष प्राप्त आत्मा हमेशा के लिए रहती है।
- इसे लॉग (संसार रूपी ब्रह्मांड) के सबसे ऊपर माना गया है, सभी स्वर्गों से भी ऊपर। ( jainknowledge.com)
2. वहाँ कौन जाता है?
- जो जीव चारों घातिया कर्म और सभी शेष कर्मों को पूरी तरह नष्ट कर देता है,
3. सिद्धशिला में आत्मा की स्थिति कैसी होती है?
सिद्धशिला में आत्मा की कुछ मुख्य विशेषताएँ:- कोई देह नहीं, केवल शुद्ध आत्मा
- न इंद्रियाँ, न भूख-प्यास, न चलना-फिरना
- न जन्म, न मृत्यु, न पुनर्जन्म
- हर आत्मा अपने-अपने स्पेस-पॉइंट में स्थिर रहती है
- चार अनंतों का अनुभव:
4. क्या यह केवल “स्टेट” है या “स्थान” भी?
जैन दर्शन में सिद्धशिला को:- एक विशिष्ट ऊर्ध्व क्षेत्र (टॉप रीजन) भी माना गया है,
- और साथ ही पूर्ण मुक्त अवस्था का नाम भी है।
5. दिगम्बर और श्वेताम्बर – क्या अंतर है?
- दोनों परम्पराएँ मानती हैं कि:
- अंतर केवल कॉस्मोलॉजी के चित्र / विवरण की बारीकियों में होता है,
6. जैन प्रतीक (सिंबल) में सिद्धशिला
जैन धर्म चिन्ह (symbol) के सबसे ऊपर जो छोटी वक्र रेखा और उसके अंदर बिंदु बना होता है, वही सिद्धशिला और एक सिद्ध आत्मा को दर्शाता है – यानी हमारा लक्ष्य – सिद्ध स्थिति। ( jainknowledge.com)आप और विस्तार से सिद्धशिला और जैन ब्रह्मांड के बारे में यहाँ पढ़ सकते हैं