जीवन की अडचण दूर करने की लिये किस्की साधना करे
जिंदगी में आ रही अड़चनों को दूर करने के लिए जैन धर्म में “किसकी साधना करें?” का सीधा उत्तर है – व्यक्ति नहीं, गुणों की साधना करें।
सबसे सरल और सबके लिए योग्य साधना:
1. रोज़ Navkar Mantra की साधना
- सुबह उठकर, नहाकर, शांत बैठकर कम से कम 9, 27 या 108 बार नवकार मंत्र जपें।
- जप के समय मन में भावना रखें:
यह मंत्र किसी से “मांगने” का नहीं, अपनी आत्मा को शुद्ध करने का साधन है। कर्म हल्के होते हैं तो अड़चनें भी धीरे‑धीरे कम होती हैं। नवकार मंत्र और उसके लाभ पर आप और पढ़ सकते हैं
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2. रोज़ थोड़ा समायिक या शांत ध्यान
- 10–15 मिनट शांत बैठकर:
- बीच‑बीच में भावना:
यह मन को स्थिर करता है, निर्णय सही होने लगते हैं, और व्यवहार की गलतियों से बनने वाला नया पाप कम होता है।
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3. प्रतिक्रमण / स्वाध्याय से बाधा का मूल कारण देखना
जीवन की कई अड़चनें हमारे अपने:- क्रोध, मान, माया, लोभ,
- झूठ, छल, कठोर वाणी,
- जीव हिंसा आदि से बने कर्मों के कारण आती हैं।
रोज़ या हफ्ते में एक बार:
- 5–10 मिनट अपने दिन की समीक्षा करें –
- मन से क्षमा माँगें – “मिच्छामी दुक्कडं”。
यह अंदर की गलती को कम करता है, जो असली “बाधा पैदा करने वाली मशीन” है।
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4. छोटा‑सा नियम (तप/संयम)
अड़चनों में आत्मबल बहुत ज़रूरी है। वह छोटे‑छोटे नियमों से आता है, जैसे:- हफ्ते में एक दिन एकासन या उपवास (शारीरिक क्षमता के अनुसार),
- रोज़ शाम को सूरज ढलने के बाद कुछ न खाना (चौविहार की दिशा में छोटा कदम),
- रोज़ कम से कम एक बार किसी एक जीव को जानबूझकर भी न सताना (अहिंसा की जागरूकता)।
नियम लेने से पहले शांत होकर नवकार मंत्र करें और मन में या शब्दों में संकल्प लें (पच्खान / प्रत्याख्यान)।
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5. “किस देव की विशेष भक्ति करें?”
जैन धर्म में मुख्य है – पंच परमेष्ठी की भक्ति:- अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय, साधु
- चित्त को स्थिर कर नवकार मंत्र,
- या उनकी स्तुति (जैसे “उवासग्गहरं स्तोत्र”, “भक्तामर स्तोत्र” – जिस पर आपकी परंपरा में आस्था हो) कर सकते हैं।
पर याद रहे – उद्देश्य केवल “सम्यक दर्शन–ज्ञान–चरित्र” की प्रार्थना हो, केवल सांसारिक कामनाएँ नहीं।
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व्यवहारिक रूप से आप आज से क्या शुरू कर सकते हैं?
- रोज़ सुबह 5–10 मिनट:
- 27 या 108 बार नवकार मंत्र (मानसिक जप हो तो अच्छा)।
- शाम को:
- 2 मिनट दिन का लेखा‑जोखा, गलती पर “मिच्छामी दुक्कडं”।
- सप्ताह में 1 दिन:
- हल्का‑सा नियम: एकासन / शाम को न खाना (अपने स्वास्थ्य के अनुसार)।
इन साधनाओं से:
- मन शांत होगा,
- निर्णय सही होंगे,
- कषाय (क्रोध, लोभ…) घटेंगे,
- और कर्मों के हल्का होने से जीवन की अड़चनें भी स्वाभाविक रूप से कम होती जाएँगी।
यदि आप चाहें तो मैं नवकार मंत्र का पूरा पाठ और बहुत सरल अर्थ भी दे सकता हूँ, ताकि जप और गहन हो।