samavsaran mai bhagwan ke upar kya rehta hai
समवसरण में भगवान के “ऊपर” क्या रहता है – इसे दो तरह से समझा जाता है:
- सीधे सिर के ठीक ऊपर क्या होता है?
भगवंत के सिंहासन (सिंहासन = आसन) के ऊपर - त्रि-छत्र (तीन छत्र/छतरी) रहता है – इसे आठ प्रतिहार्य में गिना जाता है। यह तीर्थंकर की तीन लोकों पर आध्यात्मिक प्रभुता का प्रतीक है।
- समवसरण की रचना में, ऊपर की ओर क्या माना जाता है?
- तीर्थंकर भगवान अशोक वृक्ष के नीचे विराजते हैं। यानी ऊपर की ओर पहले अशोक वृक्ष (चैत्य वृक्ष), और उसके बाद सिर के पास त्रि-छत्र दिखाया जाता है।
सीधी, सरल भाषा में:
- भगवान समवसरण में अशोक वृक्ष के नीचे बैठे हैं
- और भगवान के सिर के ठीक ऊपर त्रि-छत्र (तीन छत्र) रहता है।
समवसरण और अशोक वृक्ष व आठ प्रतिहार्य (जिनमें त्रि-छत्र भी आता है) के बारे में सरल विवरण आप यहाँ देख सकते हैं