Meaning of Ichakar stotra in hindi
इच्छाकार (इच्छाकारी) स्तोत्र का मूल अर्थ संक्षेप में (सरल हिन्दी में) इस प्रकार है:
1. स्तोत्र किसके लिए है?
इच्छाकार स्तोत्र मुख्य रूप से भगवान पार्श्वनाथ (२३वें तीर्थंकर) की वंदना का स्तोत्र है। इसमें भगवान पार्श्वनाथ सहित तीर्थंकरों के गुणों की स्तुति की जाती है।2. “इच्छाकार” शब्द का अर्थ
- इच्छा = शुभ, धर्ममयी इच्छा / अभिलाषा
- कार = करने वाला, पूर्ण करने वाला
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3. पहले श्लोक का भावार्थ (उदाहरण)
संस्कृत श्लोक (एक प्रचलित रूप): इच्छाकारं च पार्श्वं च नमस्कारं च सिद्धये। दुःखदुःख विनाशाय परं कल्याणदायकम्॥
सरल हिन्दी अर्थ:
- मैं इच्छाकार भगवान पार्श्वनाथ को नमस्कार करता हूँ,
- यह नमस्कार मेरे सिद्धि (सफलता / आध्यात्मिक उन्नति) के लिए है।
- जिनकी भक्ति और वंदना से बार‑बार आने वाले सारे दुःख नष्ट होते हैं,
- और जो परम कल्याण (शांत मन, सद्गति, मोक्षमार्ग की प्रगति) देने वाले हैं।
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4. पूरे इच्छाकार स्तोत्र का सार (भावार्थ – समग्र रूप से)
पूरा स्तोत्र कुल मिलाकर यह भाव प्रकट करता है:
- भगवान पार्श्वनाथ और अन्य तीर्थंकरों की स्तुति
- उनके अनन्त ज्ञान, दर्शन, सुख और शक्ति की वंदना की जाती है। - वे संसार के भय, संकट, रोग, बाधा आदि को दूर करने वाले बताए गए हैं।
- दुःखों का नाश और शांति की प्राप्ति
- जो भी इस स्तोत्र को श्रद्धा, विश्वास और नियम से पढ़ता / सुनता है, - उसका मानसिक तनाव, भय, चिंता कम होती है। - जीवन में शांति, साहस, धैर्य और सद्बुद्धि बढ़ती है।
- शुभ इच्छाओं की सिद्धि
- यहाँ “इच्छा‑पूर्ति” का अर्थ सिर्फ़ भौतिक चीज़ें नहीं, - बल्कि धार्मिक, सात्विक, पुण्यकारी इच्छाएँ – जैसे - पापों से मुक्ति की इच्छा, - सही मार्ग पर चलने की इच्छा, - संयम, सदाचार, अहिंसा अपनाने की इच्छा, - मोक्षमार्ग पर प्रगति की इच्छा – इन सबको पूर्ण करने वाला भगवान पार्श्वनाथ को माना गया है।
- आश्रय‑भाव (शरणागति)
- स्तोत्र में बार‑बार यह भाव आता है कि “हे प्रभु! हम कर्मों से बँधे, दुःखों से घिरे जीव हैं, आपके चरणों में शरण लेकर ही भय, रोग, संकट और बंधनों से मुक्त हो सकते हैं।”
- आध्यात्मिक लाभ का संकेत
- भावार्थ के स्तर पर, इच्छाकार स्तोत्र यह सिखाता है कि - तीर्थंकरों के गुणों का स्मरण करना स्वयं में एक महापुण्य है - ऐसा स्मरण भीतर के क्रोध, मान, माया, लोभ को धीरे‑धीरे कम करता है, - और हमें सम्यक दर्शन‑ज्ञान‑चारित्र की ओर ले जाता है।
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5. सरल समापन भाव (एक पंक्ति में)
इच्छाकार स्तोत्र का मूल अर्थ यह है कि – भगवान पार्श्वनाथ सहित तीर्थंकरों के चरणों में समर्पित होकर, हम अपने सारे दुःख, भय और बाधाओं को मिटाकर, शुभ, धर्ममयी इच्छाओं की सिद्धि और परम कल्याण (मोक्षमार्ग की प्रगति) की प्रार्थना करते हैं।
पूरे स्तोत्र की विस्तृत व्याख्या और जानकारी आप यहाँ देख सकते हैं: