भगवान महावीर किस मंत्र के साथ तपस्या करते रहे
भगवान महावीर स्वामी ने अपनी १२ वर्ष की कठोर तपस्या में मुख्य रूप से मंत्र‑जाप नहीं, बल्कि ‘आत्मध्यान’ (स्व-स्वरूप में स्थित रहना) किया। आचारांग सूत्र आदि आगमों में उनकी तपस्या का वर्णन है – वहाँ उनके:
- गहन ध्यान,
- उपवास व कष्ट-सहन,
- समता व अहिंसा के पालन
का बार‑बार उल्लेख आता है, पर यह नहीं लिखा कि वे कोई विशेष मंत्र लगातार जपते रहे हों, जैसे आज हम लोग नवकार‑मंत्र का जप करते हैं।
संक्षेप में:
- महावीर स्वामी का मुख्य “मंत्र” कहें तो वह था – आत्म का निरंतर चिंतन और कषायों पर विजय।
- बाद की परंपरा में हम लोग णमोकार (नवकार) महामंत्र को सबसे प्रमुख जैन मंत्र मानते हैं और तपस्या/ध्यान में उसका जाप करते हैं, पर इसे “महावीर स्वामी ने यही मंत्र जपा” ऐसा आगमिक प्रमाण से साफ‑साफ नहीं कहा जाता, बल्कि उनका मार्ग था – निर्विकल्प आत्मध्यान।
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