बुद्धम शरणं के तरह भगवान महावीर का कोई मंत्र है
बौद्ध धर्म में जैसा “बुद्धं शरणं गच्छामि…” है, वैसा बिलकुल हू‑ब‑हू “महावीरं शरणं गच्छामि” वाला सार्वत्रिक शरण‑मंत्र जैन परंपरा में प्रचलन में नहीं है।
जैन धर्म में:
- शरण किसकी ली जाती है?
हम किसी एक देव (जैसे केवल महावीर) की नहीं, बल्कि पूरे पंच‑परमेष्ठी की शरण लेते हैं – अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय, और सभी साधु।
- उसका मुख्य मंत्र – नवकार (णमोकार) महामंत्र
यह जैन धर्म का सबसे बड़ा शरण‑मंत्र है: - नमो अरिहंताणं। - नमो सिद्धाणं। - नमो आयरियाणं। - नमो उवज्झायाणं। - नमो लोए सव्वसाहूणं। - एसो पंच नमोक्कारो, सव्वपावप्पणासणो। - मंगलाणं च सव्वेसिं, पढमं हवई मंगलं।
इसका भाव यही है कि – “मैं सब अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय और साधु‑संतों को नमस्कार करता हूँ; यह पंच‑नमस्कार सभी पापों को नष्ट करने वाला और सब में सबसे प्रथम मंगल है।”
भगवान महावीर भी इन्हीं पंच‑परमेष्ठी में ‘अरिहंत’ और बाद में ‘सिद्ध’ रूप से शामिल हैं, इसलिए महावीर की शरण भी इसी मंत्र के भीतर आ जाती है। (नवकार मंत्र पर विस्तृत जानकारी के लिए आप यहाँ देख सकते हैं )
- केवल महावीर पर आधारित प्रचलित स्तवन/मंत्र
अलग‑अलग परंपराओं में भक्त लोग भगवान महावीर के लिए स्तवन गाते हैं, जैसे: - “महावीर स्वामी हालरडु” (माता त्रिशला की वाणी में) – यह बहुत प्रसिद्ध स्तवन है, जिसमें महावीर की वंदना और उनकी शरण माँगी जाती है। - कुछ लोग व्यक्तिगत भक्ति में ऐसा बोलते हैं – “ॐ ह्रीं श्री महावीरस्वामिने नमः” या “वीर प्रभु, महावीर प्रभु, मुझे शरण दो” आदि; पर ये व्यक्तिगत भक्ति या स्थानीय परंपरा हैं, शास्त्रीय सार्वत्रिक ‘शरण‑सूत्र’ नहीं।
सार:
- जैन धर्म का मूल और सार्वत्रिक शरण‑मंत्र णमोकार (नवकार) महामंत्र है।
- उसमें ही भगवान महावीर सहित सभी सिद्ध‑पुरुषों की शरण आती है।
- बौद्धों के “बुद्धं शरणं गच्छामि” जैसा वाक्य‑रूप सूत्र जैनों में परंपरागत रूप से नहीं,