Jain mantra for marriage
In Jainism, there is no separate “marriage‑only” mantra like in some other religions. For any auspicious work (including marriage), the most shubh and universal mantra is:
1. Navkar (Namokar) Mahamantra
Prakrit text:
णमो अरिहंताणं Namo Arihantāṇam
णमो सिद्धाणं Namo Siddhāṇam
णमो आयरियाणं Namo Āyariyāṇam
णमो उवज्जायाणं Namo Uvajjhāyāṇam
णमो लोए सव्व साहूणं Namo Loe Savva Sāhūṇam
एसो पंच नमोक्कारो, सव्व पावप्पणासणो। Eso paṇca Namokkāro, savva pāvappaṇāsano;
मंगलाणं च सव्वेसिं, पड़मं हवई मंगलं॥ Maṅgalāṇaṃ cha savvesiṃ, paḍhamaṃ havaī maṅgalaṃ॥
सरल अर्थ (arth): मैं अरिहंतों को नमन् करता हूँ। मैं सिद्धों को नमन् करता हूँ। मैं आचार्यों को नमन् करता हूँ। मैं उपाध्यायों को नमन् करता हूँ। मैं समस्त साधु‑साध्वियों को नमन् करता हूँ।
यह पाँचों प्रकार की नमस्कार सभी पाप कर्मों का नाश करनेवाली है और सब मंगलों में यह प्रथम तथा सर्वोत्तम मंगल है।
शादी में उपयोग कैसे करें:
- विवाह से पहले और विवाह के समय घर में सभी मिलकर नवकार महामंत्र का जाप करें।
- दूल्हा‑दुल्हन अलग‑अलग शांत होकर कम से कम 9, 27 या 108 बार नवकार मंत्र जपें।
- जाप करते समय यह भाव रखें:
2. एक छोटा मंगल भाव (आशीर्वाद के रूप में)
आप नवकार के बाद ऐसा भाव रखकर प्रार्थना कर सकते हैं, बिना किसी लौकिक लालसा के:
“हे पंच परमेष्ठी! हम दोनों के भीतर सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र की वृत्ति बढ़े, हमारा दाम्पत्य जीवन किसी भी जीव को हिंसा, क्लेश या दु:ख न पहुँचाए, और हम दोनों मोक्ष‑मार्ग पर चलते हुए एक‑दूसरे के सहायक बनें, बाधक नहीं।”
(यह शुद्ध भाव‑प्रार्थना है, कोई नया “मंत्र” नहीं।)
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विवाह, धन, संतान आदि किसी विशेष लाभ के लिए अलग जैन “टोटका‑मंत्र” की परंपरा नहीं है। जैन धर्म में सबसे बड़ा मंगल वही माना गया है जो आत्मा को शुद्धता और मोक्ष के मार्ग की ओर ले जाए, और उसके लिए नवकार महामंत्र ही सर्वोत्तम है।
नवकार मंत्र का महत्व और अर्थ विस्तार से आप यहाँ पढ़ सकते हैं