Chamar ka duha
“चमर का duha (doha)” के नाम से कोई एक, सर्वमान्य या शास्त्रों में निर्धारित दोहा जैन आगमों में नहीं मिलता।
जैन परंपरा में –
- “चामर / चौर” एक उपचार (सम्मान की वस्तु) है, जो तीर्थंकर भगवंत के सामने लहराया जाता है।
- इस समय सामान्यतः नवकार मंत्र, किसी स्तवन या पूजा‑ग्रंथ की पंक्तियाँ बोली जाती हैं।
- अलग‑अलग संघ, शहर या परिवारों में अपने‑अपने बनाए हुए छोटे दोहे/पंक्तियाँ चलन में हैं, लेकिन वे स्थायी शास्त्रीय दोहे नहीं हैं, बल्कि भक्तिभाव से रचे गए स्थानीय रचनाएँ हैं।
इसलिए अगर आपके यहाँ कोई विशेष “चमर का दोहा” बोला जाता है, तो वह आपके गुरुदेव / संघ के पूजा‑पाठ पर आधारित होगा। सही शब्द जानने के लिए वही ग्रंथ या अपने गुरुजी से पूछना सबसे ठीक रहेगा, ताकि परंपरा शुद्ध बनी रहे।
चमर और उसकी पूजा का जैन दृष्टि से सरल विवरण यहाँ पढ़ सकते हैं – Chamar Puja – Dhoop‑deep‑mirror‑chamar का महत्व