Savi jiv karu shashan rashi ni bhavna bhane wala kya banta hai
“Savi jiv karu śāsan-rāshi nī bhāvanā” का अर्थ है—सब जीव जैन-शासन के हित में प्रवृत्त हों, धर्म का रक्षण-संवर्धन हो।
ऐसी भावना को नियमित और श्रद्धा से अपनाने वाला—
- शास्त्रों के अनुसार शुद्ध पुण्य (शासन-सेवा पुण्य) अर्जित करता है,
- maitri, pramod, karunā, madhyasthā जैसे चार भाव मजबूत करता है,
- सम्यक्-दर्शन की तरफ प्रगति करता है, और
- व्यवहार में शासन-उपासक/उपासिका (Jain śāsan का समर्थक) माना जाता है।
Digambar और Shvetambar—दोनों परम्पराओं में इस भाव का आशय समान है: जैन-शासन की वृद्धि और सर्वजीव-कल्याण की भावना; पदावली में थोड़ा भेद हो सकता है, पर फल—पुण्य और आत्म-शुद्धि—एक ही माना गया है।
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