Muni bhagwant konsa kalp krte hai
“Muni Bhagwant kaun‑sa kalp karte hain?” Muni (Jain sadhu) “Mahāvrat-kalp” यानी पंच महाव्रतों का आजीवन, पूर्ण और निश्चल संकल्प लेते हैं.
पंच महाव्रत (साधुओं के लिए पूर्ण रूप में)
- अहिंसा: मन‑वचन‑काया से किसी भी जीव को हिंसा न करना।
- सत्य: सदा सत्य बोलना, कपट/असत्य का त्याग।
- अचौर्य (अस्तेय): जो दिया न गया हो उसे न लेना।
- ब्रह्मचर्य: पूर्ण इन्द्रियनिग्रह और काम-विकारों का सर्वथा त्याग।
- अपरिग्रह: वस्तु‑व्यक्ति‑भाव में आसक्ति का त्याग।
साथ में अनिवार्य साधन
- 5 समितियाँ: ईर्या, भाषā, एषणā, आदान‑निक्षेप, उत्सर्ग — आचरण को सावधान बनाती हैं।
- 3 गुप्तियाँ: मन‑वचन‑काया की रक्षा/संयम।
- मूलगुण/गुरुगुण: विनय, इन्द्रियनिग्रह आदि के विस्तृत गुण।
परम्परागत भेद की स्पष्टता
- दिगम्बर परम्परा: 5 महाव्रत + 5 समितियाँ + 3 गुप्तियाँ + 28 मूलगुणों का विशेष आग्रह।
- श्वेताम्बर परम्परा: कल्पसूत्र आदि में आचार के नियम; पंचिंदिया में गुरु के 36 गुण बताए जाते हैं जिनमें 5 महाव्रत, 5 समितियाँ, 3 गुप्तियाँ आदि समाहित हैं।
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