Papanubandhi paap bandhne wali ke name
“Pāpanubandhī Pāp” (पापानुबन्धी पाप) का अर्थ
- ऐसा पाप जिसका फल भोगते समय भी जीव के भीतर कषाय (क्रोध, मान, माया, लोभ) बढ़ते हैं और आगे के लिए फिर से पाप ही बँधते हैं। यह अनन्त पाप-बन्ध की कड़ी बना देता है।
अनुबन्ध (चार प्रकार) 1) पुण्यानुबन्धी पुण्य 2) पापानुबन्धी पुण्य 3) पुण्यानुबन्धी पाप 4) पापानुबन्धी पाप — इस चौथी स्थिति में “पाप” के फल से फिर “पाप” ही बँधता है।
“पापानुबन्धी पाप” बँधाने वाले प्रमुख नाम/कारण
- अष्टादश पापस्थानक (18 पाप), जिनसे पाप का बन्ध होता है और वही आगे नए पाप का कारण बनते हैं:
परम्परा-भेद
- दिगम्बर और श्वेताम्बर दोनों में “चार अनुबन्ध” की स्वीकृति है। 18 पापस्थानकों के नामों में केवल शब्द-प्रयोग/क्रम का थोड़ा अंतर मिलता है; अर्थ और साधक के लिए संदेश एक ही है—इन कारणों से पाप-बन्ध होता है और पापानुबन्धी पाप बनता है।
सरल सार