जैन धर्म के अनुसार ऐसी कौन से मुनि हैं जिन्हें लगातार 9 माह तक आहार का लाभ नहीं हुआ
जैन परंपरा में “लगातार 9 माह तक आहार (भोजन) न मिलना” जैसी सटीक अवधि का प्रामाणिक उल्लेख किसी मुनि के लिए नहीं मिलता।
सबसे प्रसिद्ध प्रसंग आदिनाथ भगवान (ऋषभदेव) का है—दीक्षा के बाद उन्हें बहुत लम्बे समय तक आहार नहीं मिला और वैशाख शुक्ल तृतीया (अक्षय तृतीया) के दिन श्रेयांस राजा से इक्षु‑रस का प्रथम आहार मिला। परंपराओं में अवधि का अंतर मिलता है:
- दिगंबर परंपरा: लगभग छह माह तक आहार न मिलने का वर्णन।
- श्वेतांबर/लोकपरंपरा: एक वर्ष (वर्षीतप) जैसा वर्णन भी मिलता है।
अतः “ठीक 9 माह” वाला संदर्भ मानक जैन ग्रंथों/परंपरा में स्थापित नहीं है; निकटतम और मान्य प्रसंग आदिनाथ प्रभु के दीर्घ उपवास का ही है। संबंधित सरल विवरण के लिए देखें: अक्षय तृतीया—प्रथम आहार कथा और आदिनाथ के उपसर्ग/प्रथम आहार का संक्षेप ।