ईर्यापथिकी दण्ड क्रिया कोनसी है?
ईर्यापथिकी दण्ड-क्रिया:
- आहार, गुरुवंदना, शौच आदि के लिए जाते‑आते मार्ग में यदि किसी जीव की विराधना हुई हो, तो उसका प्रायश्चित करने हेतु जो छोटा प्रतिक्रमण किया जाता है, वही “ईर्यापथिकी दण्ड‑क्रिया” है।
- इसका दण्डक प्राय: इस प्रकार बोला जाता है: “पडिक्कमामि भंत्ते! इरियावहियाए...” और उसके बाद नवकार मन्त्र 9 बार जपा जाता है।
- अभिप्राय: “मार्ग‑गमन (ईर्या‑पथ) के कारण जो भी अपराध हुए हों, उनका मैं विनयपूर्वक प्रतिक्रमण करता/करती हूँ।”
परम्परा भेद:
- श्वेताम्बर और दिगम्बर — दोनों में भाव एक ही है; उच्चारण में सूक्ष्म भिन्नता मिलती है (जैसे “इरियावहियाए/इयारियावहियाए”), पर उद्देश्य एक ही—मार्ग‑जन्य हिंसा का पश्चाताप और क्षमायाचन।
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