कुमारपाल महाराजा ने स्वयं देश में अमारी प्रवर्तन कराया था।
हाँ, यह कथन सही है। 12वीं शताब्दी के गुजरात के चालुक्य (सोलंकी) नरेश महाराज कुमारपाल (लगभग 1143–1172 ई.) ने आचार्य हेमचन्द्र की प्रेरणा से राज्य‑स्तर पर “अमारी प्रवर्तन” (अहिंसा/अप्राणातिपात का सार्वजनिक प्रवर्तन) कराया। इसके अंतर्गत शिकार, पशु‑वध, मद्यादि दुष्प्रवृत्तियों पर कठोर निषेध लागू हुआ और राज्य में करुणा व शाकाहार को बढ़ावा दिया गया। जैन परम्पराओं में उन्हें आदर्श जैन राजा के रूप में स्मरण किया जाता है।
परम्परा संबंधी स्पष्टता:
- श्वेतांबर ग्रन्थों (जैसे हेमचन्द्रकृत कुमारपाल‑चरित, प्रबन्धसाहित्य) में अमारी प्रवर्तन का विस्तृत वर्णन मिलता है।
- दिगंबर परम्परा भी उन्हें अहिंसा प्रवर्तक धर्मनिष्ठ राजा के रूप में सम्मानित करती है, यद्यपि विवरण का मुख्य प्रवाह श्वेतांबर साहित्य में अधिक है।
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