किसे 9 माह तक आहार नहीं मिला था जैन धर्म के अनुसार
जैन परंपरा में “9 माह तक आहार न मिलना” का उल्लेख नहीं मिलता। प्रचलित और प्रमाणित कथाएँ ये हैं:
- भगवान महावीर को दीक्षा के बाद पहले आहार के लिए 5 महीने 25 दिन तक उपयुक्त गोचरि नहीं मिली; फिर उन्हें चंदनबाला (वसुमती) से आहार मिला।
- आदिनाथ भगवान (ऋषभदेव) को दीक्षा के बाद पूर्ण एक वर्ष तक (वर्षितप) उपयुक्त आहार नहीं मिला; अंत में श्रेयान्सकुमार ने अक्षय तृतीया के दिन गन्ने का रस अर्पित किया।
निष्कर्ष: 9 माह का प्रसंग जैन ग्रंथों में मान्य नहीं है; निकटतम संदर्भ महावीर के 5 माह 25 दिन और ऋषभदेव के 12 माह के हैं। Digambar और Shwetambar—दोनों परंपराएँ इन घटनाओं को स्वीकार करती हैं, विवरणों में छोटे भेद हो सकते हैं, पर अवधि का सार यही माना जाता है।