जैसे मैने भगवान से सुना है वैसे ही कह रहा हु यह भाव किस शब्द से हवनीत है???
आपका वाक्य “जैसे मैंने भगवान से सुना है वैसे ही कह रहा/रही हूँ” का भाव परंपरागत जैन शब्दों से इस प्रकार व्यक्त होता है:
- “यथाश्रुत” — जैसे सुना/शास्त्र में जैसा श्रुत है, वैसा ही।
- “श्रुतानुसार” या “आगमानुसार” — जैन आगम/जिनवाणी के अनुसार।
- “जिनवचनानुसार” — जिनेन्द्र भगवान के वचन के अनुसार।
अर्थ
- यह विनयपूर्ण भाव बताता है कि मैं अपना मत नहीं, बल्कि भगवान की देशना जो गुरु-परंपरा/शास्त्र से “सुनी” है, वही ज्यों‑का‑त्यों रख रहा/रही हूँ। जैन दर्शन में इसे “श्रुतज्ञान” (श्रुति से प्राप्त ज्ञान) की मर्यादा मानकर कहा जाता है—यानी ज्ञान को व्यक्तिगत कल्पना नहीं, प्रमाणित जिनवाणी के आधार पर कहना।
परंपरा-भेद का संकेत
- श्वेतांबर परंपरा: आगम (श्वेतांबर आगम-संग्रह) उपलब्ध मानकर “आगमानुसार/यथाश्रुत” कहा जाता है।
- दिगंबर परंपरा: मूल प्राकृत आगम न रहने का मत होते हुए भी तत्त्वार्थसूत्र आदि प्रमाण-ग्रंथ और आचार्य-परंपरा की जिनवाणी को आधार मानकर “जिनवचनानुसार/यथाश्रुत” भाव ही रखा जाता है।
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