Dashvaikalika sutr ke चौथे अध्ययन में साधक तीन करण तीन योग से स्वाद्य त्याग की प्रतिज्ञा कितनी बार करता है ???
तीन बार।
अर्थ:
- दशलैकालिक सूत्र के चौथे अध्ययन में साधक “त्रि‑करण त्रि‑योग” से प्रतिज्ञा करता है—मन, वचन, काया से
1) मैं स्वयं नहीं करूँगा,
2) दूसरों से नहीं करवाऊँगा,
3) करने वालों का अनुमोदन नहीं करूँगा।
इसी तीनfold रूप में “स्वाद्य‑त्याग” (स्वादिम का त्याग) की प्रतिज्ञा कही जाती है। यह श्वेतांबर परंपरा के दशनैकालिक के धर्मप्रज्ञप्ति-अध्ययन में स्पष्ट है।
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