Chakravati ki aayudh shala me utpan hone wala ek ratna
उत्तर: चक्ररत्न
संक्षेप में: चक्रवर्ती के आयुध-शाला (अस्त्रागार) में स्वयं उत्पन्न होने वाला दिव्य आयुध “चक्ररत्न” होता है। यह उसकी सार्वभौम सत्ता का प्रधान चिन्ह है और धर्म-रक्षा के लिए प्रकट होता है। यह तथ्य दिगंबर और श्वेतांबर—दोनों परंपराओं में समान रूप से माना गया है।