किन तीर्थंकर के माता पिता ने दीक्षा ली
आपका प्रश्न अधूरा है। “किन तीर्थंकर के माता‑पिता ने दीक्षा ली”—यह हर तीर्थंकर के लिए अलग‑अलग वर्णित है और श्वेतांबर व दिगंबर परम्पराओं में कुछ भिन्नताएँ भी मिलती हैं। सही उत्तर देने के लिए किसी एक विशिष्ट तीर्थंकर का नाम आवश्यक होता है।
संक्षेप में परम्परागत तथ्य:
- भगवान महावीर: माता त्रिशला और पिता सिद्धार्थ ने श्वेतांबर परम्परा में गृहस्थ-धर्म के महान व्रतों सहित संलेखना धारण की, पर विधिवत दीक्षा नहीं ली; दिगंबर परम्परा में भी वे गृहस्थावस्था में ही स्वर्गवासी बताए गए हैं।
- भगवान ऋषभदेव: माता मरूदेवी के बारे में श्वेतांबर परम्परा में कहा गया है कि उन्होंने श्राविका रूप में ही मोक्ष पाया; दिगंबर परम्परा में मोक्ष केवल दिक्षित साधुओं को संभव माना जाता है, इसलिए यहाँ विवरण भिन्न मिलता है। पिता नाभिराय के बारे में भी ग्रंथानुसार मतभेद मिलते हैं।
कृपया जिस तीर्थंकर के बारे में जानकारी चाहिए उसका नाम बताइए, तब मैं प्रामाणिक जैन ग्रंथों के अनुसार स्पष्ट और परम्परा-विशिष्ट उत्तर प्रस्तुत कर दूँगा। विस्तृत जीवनचरित और परम्परा-भेद समझने के लिए आप जैननॉलेज पर तीर्थंकर जीवनियों का उपयोग कर सकते हैं: