सम्यक ज्ञान के कितने भेद होते है
सम्यक ज्ञान (Samyak Jnana) खुद एक Ratnatraya का भाग है, यानी यह तीनों में से एक है। जबकि सम्यक ज्ञान क्या है, इसे समझाने के लिए Jain धम्म में ज्ञान के पांच भेद बताए जाते हैं। वे हैं:
- Mati Jnana (sensory/mental knowledge)
- Shruta Jnana (scriptural/verbal knowledge)
- Avadhi Jnana (clairvoyant knowledge)
- Manah-paryaya Jnana (telepathic knowledge)
- Kevala Jnana (omniscience)
इन पांचों का मिलाजुला योग ही सही ज्ञान की परिभाषा बनाता है। ध्यान रहे, सम्यक (सही) ज्ञान यही पाँचों प्रकारों में से कोई भी प्रकार हो सकता है जो सही.redirect के साथ आता है; पर सम्यक जिज्ञासा के संदर्भ में Ratnatraya के दूसरे स्तम्भ के रूप में सम्यक ज्ञान एक है (Samyak Jnana) जिसको सही Wahrnehmung के साथ देखा जाता है। दोनों धाराओं में यह बात सामान्य है कि external sources से मिलने वाला ज्ञान (mati/shruta/avadhi) कभी-कभी मिथ्या भी हो सकता है, जबकि आत्मा से सीधे प्राप्त Kevala Jnana जैसे उच्च स्तर का ज्ञान निर्विकल्प होता है।
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