भगवान महावीर का तेजोलियशा का उपसर्ग कौन से नंबर का था
यह उपसर्ग 7वें नंबर का है।
- उपसर्ग: तेजोलेश्या (तेजस्विता से जुड़ा लेश्या) जिसे गौशालक ने दिया माना गया है।
- स्रोत में क्रम इस प्रकार दीखता है: 7) गौशालक ने कौन सा उपसर्ग दिया -> उत्तर तेजोलेश्या. इसलिए तेजोलेश्या नंबर-7 है। You can read more here
arth (संक्षेप में): तेजोलेश्या का अर्थ है चित्त-तेज की विशेष धारणा, जिससे व्यक्ति के भीतर तेजस्विता और दूसरे पर प्रभाव पड़ा करता है। यह शक्ति कभी शुभ-चर्या के लिए और कभी अशुभ-चर्या के लिए प्रयुक्त हो سکتی है; महावीर के समय गौशालक के संयोग में इसका दुरुपयोग भी हुआ था।
ध्यान दें: देसी-परम्पराओं में इस घटना को लेकर Digambar/Shwetambar के बीच मूल अर्थ या संख्या में अलग-अलग व्याख्याएं नहीं दी जाती हैं; घटनाक्रम सामान्य रूप से एक ही माना गया है। ऐसे विषयों में पाठ्यग्रंथों की भाषा और उद्धरणों की छोटी-छोटी बातों में भिन्नताएं आ सकती हैं, पर प्रमुख तथ्य लगभग एक ही रहते हैं।